Module 15- Activity 1: Reflect on your childhood

Take a moment and think about the memories of your childhood days and list one pleasant and the one not so pleasant memory. Also, share two stories/rhymes learnt in your early years.


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Comments

  1. Childhood is the most precious and beautiful stage of our life. We can never forget about our childhood. The most pleasant memory of childhood is the fun with our friends and the school life.

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  2. Here I am posting to poem which we have learn in begning of childhood lisent from
    "Chalte matke tamktu
    हुए बहुत दिन बुढ़िया एक
    चलती थी लाठी को टेक
    Second is
    "सुबह"

    बड़े सबेरे मुर्गा बोला,

    चिड़ियों ने अपना मुह खोला,

    आसमान मे लगा चमकने,
    In our childhood we get much fun with our friend to run in ground behind the butterfly,climbe on tree, their are so many such type of sweet memories.

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  3. Childhood memories keep the inner child alive. No matter how old we get, there is always a child within each one of us. Childhood memories shape our personality and future. They remind us of the good times and help us get by on tough days.

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  4. the memories of childhood days are lifelong some of them are pleasant and some of them are not so pleasant memory. we do everything that we want i.e playing go outside our village and enjoy there by our tricks .
    Sometimes we used to get beaten up by parents.
    होली आई, होली आई,
    रंगों की ये बारिश लाई।
    बच्चों पर है मस्ती छाई,
    मिलकर होली खेलो भाई। this is the poem I still learn

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  5. Kahte hai bachpan har gam se begana hota hai ,,,sahi baat hai balpan nirmal aur nishchal hota hai,n koi tension,n koi kaam bas khana,khelna aur padhna.kya din the we lagta hai kash! Bachpan fir loutta

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  6. Childhood is the best life ,,,, forever.
    That time only three work-
    1~eating
    2~playing
    3~reading

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  7. bachpan me padhi gayi ek kavita aur ek kahani -

    उठो लाल अब आँखें खोलो,
    पानी लायी हूँ मुंह धो लो।
    बीती रात कमल दल फूले,
    उसके ऊपर भँवरे झूले।
    चिड़िया चहक उठी पेड़ों पे,
    बहने लगी हवा अति सुंदर।
    नभ में प्यारी लाली छाई,
    धरती ने प्यारी छवि पाई।
    भोर हुई सूरज उग आया,
    जल में पड़ी सुनहरी छाया।
    नन्ही नन्ही किरणें आई,
    फूल खिले कलियाँ मुस्काई।
    इतना सुंदर समय मत खोओ,
    मेरे प्यारे अब मत सोओ।

    "कछुए और खरगोश की कहानी"
    एक वक्त की बात है, किसी घने जंगल में एक खरगोश रहता था, जिसे अपने तेज दौड़ने पर बहुत घमंड था। उसे जंगल में जो दिखता, वो उसी को अपने साथ दौड़ लगाने की चुनौती दे देता। दूसरे जानवरों के बीच वो हमेशा खुद की तारीफ करता और कई बार दूसरे का मजाक भी उड़ाता।
    एक बार उसे एक कछुआ दिखा, उसकी सुस्त चाल को देखते हुए खरगोश ने कछुए को भी दौड़ लगाने की चुनौती दे दी। कछुए ने खरगोश की चुनौती मान ली और दौड़ लगाने के लिए तैयार हो गया।
    जंगल के सभी जानवर कछुए और खरगोश की दौड़ देखने के लिए जमा हो गए। दौड़ शुरू हो गई और खरगोश तेजी से दौड़ने लगा और कछुआ अपनी धीमी चाल से आगे बढ़ने लगा। थोड़ी दूर पहुंचने के बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा, तो उसे कछुआ कहीं नहीं दिखा। खरगोश ने सोचा, कछुआ तो बहुत धीरे-धीरे चल रहा है और उसे यहां तक पहुंचने में काफी वक्त लग जाएगा, क्यों न थोड़ी देर आराम ही कर लिया जाए। यह सोचते हुए वह एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा।
    पेड़ के नीचे सुस्ताते-सुस्ताते कब उसकी आंख लग गई, उसे पता भी नहीं चला। उधर, कछुआ धीरे-धीरे और बिना रुके लक्ष्य तक पहुंच गया। उसकी जीत देखकर बाकी जानवरों ने तालियां बजानी शुरू कर दी। तालियों की आवाज सुनकर खरगोश की नींद खुल गई और वो दौड़कर जीत की रेखा तक पहुंचा, लेकिन कछुआ तो पहले ही जीत चुका था और खरगोश पछताता रह गया।
    कहानी से सीख
    इस कहानी से यही सीख मिलती है कि जो धैर्य और मेहनत से काम करता है, उसकी जीत पक्की होती है और जिन्हें खुद पर या अपने किए हुए कार्य पर घमंड होता है, उसका घमंड कभी न कभी टूटता जरूर है।

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  8. क बड़े से जंगल में काफी सारे जानवर रहते थे। उसी जंगल में एक ऊंट और एक सियार भी रहते थे। उन दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी। कोई भी काम हो, दोनों हमेशा साथ में मिलकर करते थे।


    until aur siyar 1

    भोजन की तलाश में भी दोनों साथ ही निकलते थे। एक दिन दोनों को बहुत जोरों की भूख लगी पर उनके लिए कोई भोजन का बंदोबस्त नहीं हो पा रहा था। दोनों भोजन की तलाश में इधर उधर भटक रहे थे। अचानक ऊंट को तरबूज का बड़ा सा खेत दिखाई दिया और उसने सियार को खेत के बारे में बताया। फिर दोनों ने मिलकर यह निर्णय कर लिया की आज का भोजन वे यहीं पर कर के जाएंगे। पर समस्या यह थी की खेत और उन दोनों के बीच एक बड़ी सी नदी बह रही थी।

    दोनों ने मिलकर इस समस्या का समाधान निकाल लिया। तय ये हुआ कि सियार ऊंट के पीठ पर चढ़ जाएगा और ऊंट अपने लम्बे पैरों की बदौलत नदी को पार कर जाएगा। इस तरह ऊंट और सियार दोनों ने नदी को पार कर तरबूज के खेत में चले गए और दोनों ने जम के तरबूज खाए। सियार का पेट छोटा था सो जल्दी भर गया पर ऊंट का पेट तो बहुत बड़ा था, जो अभी तक नहीं भरा था। सियार की एक बड़ी गन्दी आदत थी, खाना खाने के बाद वो जोर जोर से आवाजें निकालता था। उसका कहना था कि खाने के बाद आवाजें निकालने से उसको भोजन पचाने में मदद होती है। सियार ने जब आवाज निकालना शुरू किया तो ऊंट ने उससे बहुत मिन्नतें की, कि वो अभी आवाज ना निकालें। उसे अभी और खाना है और अगर वो लगातार आवाजें निकालता रहा तो खेत का मालिक आ जाएगा। मालिक के आने पर सियार तो कहीं छुप-छुपाकर भाग जाएगा पर ऊंट तो कहीं छिप भी नहीं सकता और तेज उससे भागा नहीं जाता।


    until aur siyar 2

    ऊंट की इतनी मिन्नतों के बाद भी सियार ने आवाजें निकालना बंद नहीं किया और उसके परिणाम स्वरुप मालिक डंडा लेकर भागा-भागा आया। मालिक को देखते ही सियार तो भाग खड़ा हुआ पर ऊंट भाग नहीं पाया और उसकी जमकर पिटाई हो गई।



    किसी तरह अपनी जान बचाकर जब ऊंट नदी किनारे पहुँचा तो सियार वहाँ उसका इंतजार कर रहा था। ऊंट काफी गुस्से में था। ऊंट को देखते ही सियार ने अपनी सफाई देनी शुरू कर दी। उसका कहना था कि खाने के बाद आवाजें निकालने से वो खुद को रोक नहीं पाता है। इसीलिए ऐसा हो गया। अब बारी थी नदी को पार करने की, सो सियार पहले की तरह ऊंट के पीठ पर सवार हो गया। ऊंट जब नदी के ठीक बीचो-बीच पहुँच गया तब उसने सियार से कहा कि उसे नदी में बैठने का मन कर रहा है।

    until aur siyar 3 सियार ने ऊंट को अपनी जान की दुहाई देते हुए कहा कि अगर तुम नदी में बैठोगे तो मैं तो डूब जाऊँगा। कृपया ऐसा काम मत करो। पर जैसा की खेत में सियार ने किया था, ऊंट ने भी अपने मन की इच्छा पूरी की और पानी में बैठ गया। ऊंट के बैठते ही पानी के तेज बहाव में सियार बह गया और डूब गया।



    सीख : दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि आप जैसा करोगे, वैसा पाओगे

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  9. Bachpan ki sunhari yaden bhulaye nahi bhlti h.bachpan jiwan ka swarnim kal hota h. Kisi prakar ka koi tansion nahi sirf masti hi masti.subah sham luka chhhipi,gilli danda,kancha khelna.pedon par chadna,school me masti.kash wo din fir laut ke aa jate.bachpan ki do kavita ko mujhe aaj bhi yad h.........
    हम भारत के बीर सिपाही आगे बढ़ते जाएंगे,
    मुश्किल कितनी ही आए उससे नही घबराएंगे...........................
    And second
    उठो लाल अब आंखे खोलो
    पानी लाई हूं मुंह धो लो।
    बीती रात कमल दल खिले...........

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  10. मेरा बचपन बहुत ही अच्छा गुजरा है।मेरे माता पिता मेरा बहुत ध्यान रखते थे।गर्मियों में हम सभी लोग आँगन में सोते थे, तब आसमान एक स्थान में सात तारों को देखकर हमें यह कहानी सुनाई जाती थी, कि हमारे देश के सात ऋषियों के नाम से प्रसिद्ध तारों के समूह को सप्तर्षि कहा जाता है।इनमें चार सामने की तरफ और तीन पीछे की ओर दिखाई देते थे।इन तारों का नाम है क्रतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, अंगिरस, वशिष्ठ तथा मारीचि।
    और दूसरी कहानी लालची मगरमच्छ की है।एक तालाब में एक मगरमच्छ और उसकी पत्नी रहते थे और तालाब के किनारे एक जामुन का पेड़ था जिसमें एक बंदर रहता थाऔर वह पेड़ से खूब जामुन खाता था।तालाब के किनारे जब मगरमच्छ आता था तो बंदर उसे भी जामुन खिलाता था और अपनी पत्नी के लिए भी ले जाता था।एक दिन उसकी पत्नी ने कहा कि ये जामुन कितने मीठे हैं, बंदर इसे रोज खाता है,तो उसका कलेजा कितना मीठा होगा।उसके मन में बंदर को खाने की लालच आ गई।उसने अपने पति से उसे घर लाने को कहा।मगरमच्छ बंदर झूठ बोलकर अपने साथ अपने घर ले जाने के लिये मना लिया।मगरमच्छ अपनी पीठ में बंदर को बिठा कर ले जाने लगा, जब वह तालाब के बीच में पहुँचा तो उसने बंदर को सारी बात बताई और कहा कि मेरी पत्नि उसके कलेजे को खाना चाहती है, बंदर ने सारी बात सुनी और कहा कि अरे यार तुमने पहले मुझे ये बात क्यों नहीं बताई, मैं तो अपना कलेजा पेड़ में ही छोड़ कर आया हूँ, अब उसे वापस लेने जाना पड़ेगा, तब मगरमच्छ कहता है कि तो वापस चलते हैं, क्योंकि अगर मैं तुम्हारा कलेजा लेकर नहीं गया तो वह मुझे घर में घुसने नहीं देगी, और वह वापस पेड़ की तरफ मुड़ जाता है, जैसे ही वे दोनों पेड़ के पास पहुँचते हैं, बंदर उछाल मार कर पेड़ में चढ़ जाता है और मगरमच्छ से कहता है कि मैं तुमको अपना दोस्त समझा और तुम पर विश्वास किया और लालच में आकर तुमने मुझे धोखा दिया, अरे मुर्ख कोई अपने कलेजे के बिना जिंदा रह सकता है क्या?आज से मेरी तुम्हारी दोस्ती खत्म होती है।
    इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि लालच का फल बुरा होता है।

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  11. First childhood memories:
    Vacation,First day of school,birthday parties,Receiving a gift,Playing with friends,Family Holidays,Playing Hide and Seek ,The School
    Playground,Climbing Trees,School Lunches .
    A sprain is the injury caused by spraining a joint was unforgettable experience of childhood.

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  12. Childhood is the Golden time of our life. It is the most fun and memorable time in anyone's life. ... Besides, this is the time that shapes up the future. The parents love and care for their children and the children to the same too. Moreover, it's the golden period of life in which we can teach children everything. A happy childhood makes for a successful adulthood. Childrens are free from all the worries and busy life and the stress. Childrens are representative of God.
    Anil Kumar
    EMRS Bharmour
    Chamba HP

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  13. Childhood reminiscences are memories that we can’t forget ever. Some incidents are so bright in our minds that we recall it again and again. The whole lot was different when I was a child, the trees were higher, the colours were brighter, and every new day was more exciting than the last. I’ve finished my school from a village primary school, that was a very good experience for me.

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  14. The games we used to play the most was Gilli danda, khoo khoo,run -statue and I quite remember that I was terrible at playing gilli danda

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  15. The games we used to play the most was Gilli danda, khoo khoo,run -statue and I quite remember that I was terrible at playing gilli danda

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  16. my childhood life was good.. enjoyed with family member but i lost my one of my best friend in an accident. i learnt
    1- chal re matke tamak to and
    2- jiji aayi mithai layi.

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  17. बचपन की मधुर यादें हक उम्र में व्यक्ति को पुलकित और रोमांचित करती है। यदि घर के बच्चों की शरारतों और क्रीड़ाओ को देखकर मन बरबस ही स्वयं के बचपन की मधुर यादों में खो जाता है। बचपन में बिना किसी भेदभाव छल कपट एवं स्वतंत्र होकर घूमना हमें आज भी याद आता है। ***************†*************** बचपन की कविता की दो पंक्ति_ _ _ । रंग बिरंगी प्यारी तितली, आंखों को तुम भाती हो। पास नहीं क्यों आती तितली, दूर दूर क्यों रहती हो। इस डाली से उस डाली पर, उड़उड़ कर क्यों जाती हो। सुंदर सुंदर प्यारी तितली, सबके मन को भाती है। इतनी बात बता दो हमको, हाथ नहीं क्यों आती हो।
    *************************।
    एक समय की बात है किसी जंगल के एक पेड़ के कोटर पर एक तोता का जोड़ा निवास करता था। उनके दो बच्चे थे, एक दिन जोड़ों की आंधी और तूफान आया तूफान में दोनों बच्चे उस पेड़ के कोटा से गिरकर एक दूसरे से बिछड़ गए। एक तोता किसी चोर के हाथ में लग गया, तथा दूसरा किसी संत के हाथ लगा। दिन गुजरते दोनों अपने अपने मालिक के साथ रहकर उनका आचार विचार और भाषा सीख गए। उसी जंगल राजा शिकार के लिए पहुंचा कड़ाके की धूप होने के कारण राजा को जोर से प्यास लगने लगी राजा पानी की तलाश में ढूंढते ढूंढते एक कुटिया के पास पहुंचा, ऐसे ही कुटिया के पास पहुंचा तोता जोर जोर से चिल्लाने लगा। पकड़ो पकड़ो जाने ना पाए, यह राजा हीरे मोती से लदा है। राजा तोता की बात सुनकर वहां से उठ कर भागने लगा, कुछ दूर जाकर दूसरी कुटिया के पास पहुंचा। कुटिया के पास पहुंचते ही दूसरे तोता ने बोला, आइए पधारिए पानी ले लीजिए यह बात सुनकर राजा बहुत ही अचंभा में पड़ गया। राजा ने कहा यह एक तोता जो साधु संतों की बात करता है और वह एक होता जो चोर की भांति बात करता है। तोता सुनकर बोलने लगा, आप सही कह रहे हैं वह मेरा भाई है हम दोनों एक दूसरे से बिछड़ कर अलग अलग हो गए वह चोरों की संगति में पढ़ कर उसी की भाषा बोलता है मैं सज्जन व्यक्ति के साथ रहा कर उनकी भाषा बोलता हूं । इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति पर संगति का असर एक न एक दिन अवश्य पड़ता है।

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  18. In my childhood my parents, Grand mother, Grand father loving us a lot. In my childhood we go village of them And playing different things. We visit the village and for bath we go big pond fully filled with lotus It shows much beautiful. Ponds water is very clear suddenly rains and winds come and we just run in fully speed for home.I like story which telling grand ma. In course of time I like story of raja rani,Angel.and in rhymes I like most badi bhali hai amma meri meetha doodh pilati hai. Taje taje fal le lekar mujhko bahut khilati hai.. ।।।।

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  19. Childhood time is a very happiest time in our life.One thing would have to do is eat,drink,sleep or play. There is no one cares about the future.

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  20. Childhood is always known for unique works like getting a rupee note for singing a squirrel in ground. catching the red coloured king velvet worm. tying asmall butterflys tail and fliying a helicopter,rubbing the finger 108 times on the forehead to god used to have darshan , on getting 10.20,,25 paise after going to the running awayto buying ballons and chocolates of different colours these moovment are valuable and enjoyeble

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  21. अगर आज हम अपना बचपन याद करें तो केवल सुनहरी यादें ही याद आती है, ना किसी से बैर, न किसी से द्वेष, ना समय की फिक्र ना किसी चीज की चिंता, केवल हंसना, खेलना, खाना-पीना, स्कूल और कुछ गिने चुने दोस्तों में जिंदगी सिमटी हुई सी बेहद ही खूबसूरत सी थी।

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  22. Childhood is the golden time of whole life for everyone in which having no tention,no fear, no responsibility having only Happy ,fun and musti.
    I want to share a pleasant movement in which I got 1st rank in 5th Board examination with 89% in my district .
    And an unpleasant movement when my lovely pet (Rabbit) was killed by a dog . really this was very painful for me

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  23. I remember most pleasant moment of childhood when we swam in khad during monsoon seasons and doing work together in paddy fields .and one unpleasant memory when we got punishment during noisy times.

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  24. मेरा बचपन बहुत ही खास है क्योंकि मैंने अपना बचपन अपने दादा दादी के साथ बिताया, मेरे पेरेंट्स बाहर जॉब करते थे तो मुझे दादा दादी के साथ रहना अच्छा लगता था। मुझे एक कविता है बचपन की जो बहुत पसंद है उसकी चार लाइन है -
    "जगमग - जगमग दिये जल उठे
    द्वार- द्वार चमकी दिवाली
    कील बताशे बाँट रही है
    अम्मा सबको भर - भर थाली"

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  25. बचपन हर किसी के लिए जीवन का सुनहरा समय होता है, जिसमें न कोई टेंशन, न कोई डर, न कोई जिम्मेदारी होती है, बस खुशियां, मस्ती और मस्ती होती है। मुझे एक कविता है बचपन की जो बहुत पसंद है उसकी लाइन है -
    ----हुए बहुत दिन बुढ़िया एक
    चलती थी लाठी को टेक--------
    X

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  26. Childhood is the best stage of our life where there is no worry and no care .it's a carefree stage.
    My one of the most lovable poem ever is
    Rain rain go away
    Little jony wants to play...

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  27. Those were the golden days. I learnt a lot in my childhood without knowing it's benefits. I think those values are paying me now. I convey my heartiest gratitudes to my parents and teachers.

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  28. Here I am posting to poem which we have learn in begning of childhood lisent from
    "Chalte matke tamktu
    हुए बहुत दिन बुढ़िया एक
    चलती थी लाठी को टेक
    Second is
    "सुबह"

    बड़े सबेरे मुर्गा बोला,

    चिड़ियों ने अपना मुह खोला,

    आसमान मे लगा चमकने

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  29. मुझे मेरा बहुत ही अच्छा लगता है। ऐसा लगता है काश वह वापस आ जाए। खुले उन्मुक्त गगन में उड़ने की चाह जैसा था मेरा बचपन। परिवार में माता-पिता ने कभी भी भाइयों एवं बहनों में भेद नहीं किया। सभी को समान रुप से पढ़ाया लिखाया और बड़ा किया। हमारा समय वह था जब लोग जेंडर संस्कृति के बारे में समानता नहीं रखते थे। बहुत ही रूढ़िवादी सांस्कृतिक सामाजिक परिवेश के अंतर्गत रहते थे। हम भाग्यशाली हैं कि हमारे माता-पिता ने इस समानता को आज तक बरकरार रखा है। तभी हम यहां पहुंच पाए हैं और आज भी समान हैं। जिससे वह समानता हम अपने बच्चों को, परिवार, समाज, समुदाय एवं शाला में बच्चों को दे पा रहे हैं।
    खेल हमारे जीवन का अभिन्न अंग था। हम स्कूल पैदल ही खेल खेल में जाते थे ।अपने साथियों के साथ मौज मस्ती करते थे और खुशी-खुशी स्कूल जाते थे। घर से बाहर भी खेलने वाले खेल थे पितूल ,बाटी , भंवरा , बिल्लस, एवं गोला बनाकर खेलना आदि।
    हम गर्मी के दिन में छुट्टियों में इंडोर गेम भी खेलते थे जैसे गुड़ियों का खेल, तिरी पासा (लूडो जैसा खेल),कौड़ि या छक्का ग्रामीण परिवेश के मनोरंजन के खेल आदि। हमारी सनम फिल्म क्या आईसीटी का जमाना नहीं था दूरदर्शन पर भी गिने चुने कार्यक्रमआते थे।
    हमारे समय में जो कविताएं पढ़ी जाती थी उनमें से कुछ मुझे आज भी याद है। जो मुझे बहुत ही अच्छी लगती है और यह हमें बताते हैं कि हमारी मेमोरी आज भी इतनी मजबूत है।

    (1) हुए बहुत दिन क्या बुढिया एक
    चलती थी लाठी को टेक।
    उसके पास बहुत था माल
    जाना था उसको ससुराल।
    मगर राह में चीते शेर
    लेते थे राही को घेर।
    बुढिया ने सोची तरकीब
    जिससे चमक उठी तकदीर।
    मटका एक मंगाया मोल
    लंबा लंबा गोल ममटोल।
    बुढिया गाती जाती यूं
    चल रे मटके टम्मक टू।
    (2) ‌ एक दिन मैं मेले से आई
    संग में बड़ा पिटारा लाई।
    उसमें निकला गप्पू गोला
    दिया तमाचा टे टे बोला।
    और कठपुतली बनकर नाचा
    बंधे हुए निकले दो शेर
    उन शेरों पर सवारी करी।
    राह में मिल गई सड़ी सुपारी
    सड़ी सुपारी फौरन काटा।
    उसमें निकला नौ मन आटा
    उस आटे की घोली लस्सी
    उससे निकला बकरा खस्सी
    उस बकरे की टेड़ी पूंछ
    मेरे बाबा की थी मूंछ






    (1)
    (1)

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  30. Childhood reminiscences are memories that we can’t forget ever. Some incidents are so bright in our minds that we recall it again and again. The whole lot was different when I was a child, the trees were higher, the colours were brighter, and every new day was more exciting than the last. I’ve finished my school from a village primary school, that was a very good experience for me.

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  31. बचपन में पढ़ी गयी एक कविता और एक कहानी नीचे है - खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी I
    बुंदेले हर बोलों के मुह हमने सुनी कहानी थी II
    एक कहानी -
    एक अँधा ब्यक्ति था ,जिसका नाम गंगाराम था और एक लंगड़ा ब्यक्ति था ,जिसका नाम ठण्डा राम था I दोनों मेला देखने जाना चाहते थे ,किन्तु शारीरिक विकलांगता के कारण नहीं जा सक रहे थे I एक दिन उन्हें उपाय सूझा कि क्यों न एक दुसरे के सहयोग से मेला देखने चलें I
    फिर अँधा ब्यक्ति गंगाराम के कंधे पर लंगड़ा ब्यक्ति ठण्डा राम बैठकर उसे मार्ग दिखाने लगा ,गंगाराम ठंडाराम के अनुसार आगे बड़ते गया और दोनों मेला में पहुच गये तथा बहुत खुश हुए I

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  32. Childhood reminiscences are memories that we can’t forget ever. Some incidents are so bright in our minds that we recall it again and again. The whole lot was different when I was a child, the trees were higher, the colours were brighter, and every new day was more exciting than the last. I’ve finished my school from a village primary school, that was a very good experience for me.

    Rajpaul Mehta
    TGT (Art) EMRS Nichar Kinnaur (HP)

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  33. Jeevan Ka sabse sundar samay bachpan hi hota hai....therer r so many sweet memories about my childhood... climbing
    on tree... flying kites,,, playing kanchas,,,beri ,,,Sa
    Aam ,,,jamun ke ped aur unko chav tale khelna....my childhood is awesome....
    Poem...chal re matke tammak too .....
    LAL bujhakkad bujh ke aur na bujho koi

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  34. suman Bhardwaj tgt Hindi ghansore seoni m.p

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  35. While playing learning we fell more pleasant , when we get pictorial books we feel more pleasant , while playing some games we feel more pleasant, unpleasant moment is teacher came and teach , lots of homework etc.in rhyme I like because while singing this rhyme our teachers teach some action according to lyrics .
    Twinkle twinkle little star.

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